सामान्य ज्ञान

जलवायु परिवर्तन निबंध : Climate Change Essay Notes in Hindi

जलवायु परिवर्तन निबंध : दरअसल, पिछली कुछ सदियों से हमारी जलवायु में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है. यानी, दुनिया के विभिन्न देशों में सैकड़ों सालों से जो औसत तापमान बना हुआ था, वह अब बदल रहा है. Climate Change Essay Notes

जलवायु परिवर्तन शब्द आज के समय में अक्सर हमे, कही-न-कही समाचार पत्रों में और टीवी में अक्सर सुनाई देता है जिस शब्द का जिक्र होते ही मन में कही ना कही चिंता/भाव भी जरुर आने लगती है अर्थात जलवायु परिवर्तन यानी Climate Change Essay मौसम के दशाओ के परिवर्तन से लिया जाता है जिसे पूरा विश्व में अब Global Warming के नाम से भी जाना जाता है जिसका असर धीरे-धीरे चलकर दीर्घकालिक रूप में देखने को मिलता है | तो आज हम आप सभी विद्यार्थियों को  “जलवायु परिवर्तन” से सम्बंधित जानकारी  देगे, Climate Change Essay Notes in Hindi : जिनसे अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में “Climate Change Essay Notes” से बहुत से प्रश्न परीक्षाओं में पूछ लिए जाते है | इसलिए आप सभी Jalvayu Parivartan Nibandh को अच्छे तरह से जरुर पढ़ लीजिए |

Climate Change Essay Notes (जलवायु परिवर्तन निबंध) :



जलवायु परिवर्तन मौसम के दीर्घकालिक बदलाव का परिणाम कहा जाता है जबतक सिर्फ 1 दो महीने में यदि ऋतू परिवर्तन हो तो उसे मौसम कहा जाता है लेकिन जबतक लम्बे समय के परिणाम के फलस्वरूप मौसम में आए बदलाव को जलवायु परिवर्तन (Climate Change) कहा जाता है अर्थात जलवायु परिवर्तन मौसमी दशाओ के बदलाव को कहा जाता है यह जलवायु परिवर्तन मानव और प्राकृतिक दोनों कारण से हो सकता है |

Climate Change Essay Notes in Hindi

मनुष्य द्वारा औद्योगिक क्रांति के बाद में जलवायु परिवर्तन (Climate Change Essay Notes) में बहुत ज्यादा परिवर्तन देखने को मिला है जिसका प्रभाव हरितगृह प्रभाव (Green House Effect) के रूप में देखने को मिल रहा है जिसका मुख्य कारण औद्योगिक काल कारखानों से निकलने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों का दुष्परिणाम ही है जो अनेक तरह की जहरीली गैसों के वायुमंडल में मिलने के कारण जलवायु परिवर्तन देखने को मिल रहा है |

जलवायु परिवर्तन है क्या?

  • पृथ्वी का औसत तापमान अभी लगभग 15 डिग्री सेल्सियस है, हालाँकि भूगर्भीय प्रमाण बताते हैं कि पूर्व में ये बहुत अधिक या कम रहा है. लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों में जलवायु में अचानक तेज़ी से बदलाव हो रहा है.
  • मौसम की अपनी खासियत होती है, लेकिन अब इसका ढंग बदल रहा है. गर्मियां लंबी होती जा रही हैं, और सर्दियां छोटी. पूरी दुनिया में ऐसा हो रहा है. यही है जलवायु परिवर्तन.
  • अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है. जवाब भी किसी से छिपा नहीं है और अक्सर लोगों की जुबां पर होता है ‘ग्रीन हाउस इफेक्ट’.
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What is Green House Effect in Hindi 

  • पृथ्वी का वातावरण जिस तरह से सूर्य की कुछ ऊर्जा को ग्रहण करता है, उसे ग्रीन हाउस इफेक्ट कहते हैं. पृथ्वी के चारों ओर ग्रीन हाउस गैसों की एक परत होती है. इन गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड शामिल हैं.
  • ये परत सूर्य की अधिकतर ऊर्जा को सोख लेती है और फिर इसे पृथ्वी की चारों दिशाओं में पहुँचाती है.
  • जो ऊर्जा पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है, उसके कारण पृथ्वी की सतह गर्म रहती है. अगर ये सतह नहीं होती तो धरती 30 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा ठंडी होती. मतलब साफ है कि अगर ग्रीनहाउस गैसें नहीं होतीं तो पृथ्वी पर जीवन नहीं होता.
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि हम लोग उद्योगों और कृषि के जरिए जो गैसे वातावरण में छोड़ रहे हैं (जिसे वैज्ञानिक भाषा में उत्सर्जन कहते हैं), उससे ग्रीन हाउस गैसों की परत मोटी होती जा रही है.

What is Green House Effect in Hindi

  • ये परत अधिक ऊर्जा सोख रही है और धरती का तापमान बढ़ा रही है. इसे आमतौर पर [ Globle Warming ग्लोबल वार्मिंग या Climate Change जलवायु परिवर्तन ] भी कहा जाता है.
  • इनमें सबसे ख़तरनाक है कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का बढ़ना. कार्बन डाइऑक्साइड तब बनती है जब हम ईंधन जलाते हैं. मसलन- कोयला.
  • जंगलों की कटाई ने इस समस्या को और बढ़ाया है. जो कार्बन डाइऑक्साइड पेड-पौधे सोखते थे, वो भी वातावरण में घुल रही है. मानवीय गतिविधियों से दूसरी ग्रीनहाउस गैसों मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन भी बढ़ा है, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में इनकी मात्रा बहुत कम है.
  • 1750 में औद्योगिक क्रांति के बाद कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है. मीथेन का स्तर 140 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है. वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर आठ लाख वर्षों के सर्वोच्च स्तर पर है.

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जलवायु परिवर्तन का हम पर क्या है असर ?

  • असल में कितना असर होगा इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ कहना तो मुश्किल है. लेकिन इससे पीने के पानी की कमी हो सकती है, खाद्यान्न उत्पादन में कमी आ सकती है, बाढ़, तूफ़ान, सूखा और गर्म हवाएं चलने की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
  • जलवायु परिवर्तन का सबसे ज़्यादा असर ग़रीब मुल्कों पर पड़ सकता है. इंसानों और जीव जंतुओं कि ज़िंदगी पर असर पड़ेगा. ख़ास तरह के मौसम में रहने वाले पेड़ और जीव-जंतुओं के विलुप्त होने का ख़तरा बढ़ सकता है .
  • लोगों की आयु सीमा पर इजाफा हो सकता है, ज्यादा दिन के बजाय कम ही दिन जीना, इत्यादि.

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Climate change Reason in Hindi (जलवायु परिवर्तन के कारण) :

  1. इस पृथ्वी के तापमान का निर्धारण सूर्य के ताप पर निर्भर करता है यानी सूर्य से निकलने वाली ताप आर उर्जा यदि सीधे धरती पर आने लगे तो एक ही झटके में इस पृथ्वी का इतना अधिक तापमान बढ़ जायेगा जिसके कारण धरती जल उठ सकती है और मानव ही नही वरन किसी भी प्रकार का कोई जीवन अस्तित्व में नही रह सकता है
  2. और ऐसे में जलवायु परिवर्तन के बहुत से कारण होते है जो मानव और प्राकृतिक दोनों हो सकते है सूर्य के कक्षा में बदलाव, पृथ्वी के कक्ष में बदलाव, धरती पर विद्यमान सागर, महासागर, महाद्वीप में परिवर्तन, अनेक प्रकार के अनियमित प्राकृतिक दोहन, ग्रीन हाउस प्रभाव, अनेक विषैली गैसों का वातावरण में मात्रा अनुपात का बढ़ना, प्राकृतिक कारण जैसे भूकम्प, ज्वालामुखी, समुद्री भूकम्प, सुनामी लहरे जैसे अनेक कारण हो सकते है जो की पृथ्वी और सूर्य के बीच में स्थित पराबैगनी किरणों को आने से रोकती है जिसका नष्ट होना भी जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है
  3. ये जलवायु परिवर्तन धीरे धीरे सालो की प्रक्रिया के बाद होते है जिसका असर हमे दीर्घकालिक समय के बाद ही देखने को मिलता है इसकी अधिकता औद्योगिक क्रांति के बाद काफी बढ़ गयी है
  4. वैज्ञानिको ने अपने Research के आधार पर पाया है की वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड और ग्रीन हाउस गैसों (मुख्यतः कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन, नाईट्रीयस ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, हाइड्रो फ्लोरो कार्बन) की मात्रा का लेवल बहुत अधिक बढ़ गया है जिसके कारण सूर्य से निकलने वाली ऊष्मा जब धरती पर आती है तो इन ग्रीन हाउस गैसों के चलते ये तापमान वापस लौट नही पाते है जिसके कारण पृथ्वी के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है अब आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते है किस प्रकार गर्मियों में हर साल तापमान बढ़ता ही जा रहा है जिसके कारण गर्मी बढती ही जा रही है |

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Climate Change Problem Solution (जलवायु परिवर्तन के समाधान) :

  1. सबसे पहले हमे अन्तराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के समाधान के लिए एकजुट होकर कोशिश करना चाहिए क्योकि यह किसी देश का निजी मामला नही बल्कि इस धरती के अस्तित्व से जुड़ा हुआ सवाल है जिस दिन सभी देश इस बात को समझ जाएगे सभी एकजुट होकर इस समस्या का समाधान कर सकते है तो इस प्रकार यदि पूरा विश्व एक मंच पर जलवायु परिवर्तन | Climate Change एवं Global Warming के खिलाफ खड़ा होता है निश्चित ही इस समस्या से निजात प् सकते है |
  2. जलवायु परिवर्तन के जिम्मेदार हमारी औद्योगिक व्यवस्था भी है हमे यह सुनिश्चित करना चाहिए की कल कारखानों से निकलने वाली गंदे पानी, रासायनिक तत्वों वाले पानी को कभी भी खुले पानी में नही मिलने देना चाहिए जिससे की हमारी पीने योग्य पानी सुरक्षित रहे जिससे होने वाली अनेक बीमारियों से सीधे सीधे रूप में बच सकते है
  3. और इन कारखानों से निकलने वाली चिमनियो के धुएं, जहरीली गैसों को भी वातावरण में नही मिलने देना चाहिए ताकि हमारा वातावरण दूषित ना हो और सभी को स्वास लेने के लिए शुद्ध वायु मिल सके
  4. मनुष्य को अंधाधुंध प्राकृतिक दोहन से बचना चाहिए यदि देखा जाय तो मानव अपनी आवश्कताओ के पूर्ति के लिए बड़े बड़े पहाड़ो को काटकर सीमेंट बनाया जा रहा है और उनसे अनेक प्रकार के नित नये प्रयोग भी किये जा रहे है जिसके कारण उस क्षेत्र में प्राकृतिक विषमता बनती जा रही है |
  5. प्रकृति ने जो स्थान जिस चीज के लिए निर्धारण किया उसमे हमारा हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है जिसके कारण भयंकर बाढ़, भयंकर बारिश, भूकम्प जैसे अनेक आ रहे है जिन स्थानों पर पहले जहा बड़े बड़े जंगल हुआ करते थे इंसानों ने उन जंगलो को काटकर अब शहर बसा रहे है जिसके कारण प्राकृतिक तन्त्र में विषमता भी आने लगी है जिसके कारण से अनेक दुष्प्रभाव देखने जाने लगे है|
आशा करते है की , Climate Change Essay Notes जलवायु परिवर्तन निबंध से सम्बंधित सभी जानकारियां प्राप्त होगी ! जलवायु परिवर्तन के समाधान है की सबसे पहले हमें अपने आस-पास की गंदगी और पेड़-पौधे को सुरक्षित रखने होगे और गंदगी को साफ़ करना होगा, यही यही सबसे  बड़ा समाधान है |



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