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India me Panchayati raj kab aur kaha lagu huwa

पंचायती राज व्यवस्था

Panchayti Raj (पंचायती राज) की सर्वप्रथम झलक वैदिक काल में सभा और समिति के रूप में दिखाई पड़ता है | मौर्य काल में स्थानिक और मुगल काल में खूंट, मुक्कदम चौधरी स्थानीय स्तर पर Panchayati raj system के सत्ता का प्रयोग करते थे | ब्रिटिश काल में 1773 के Act द्वारा सत्ता का विकेंद्रीकरण किया गया |- मुंबई, मद्रास और कोलकाता प्रेसिडेंसी को बंगाल प्रेसिडेंसी के अधीन कर दिया गया |
Act 1833 दक्षता का पूर्णतया केंद्रीकरण कर दिया गया | जो 1870 में लॉर्ड मेयो के द्वारा वित्तीय विकेंद्रीकरण की दिशा में प्रयास किया गया |

  • लार्ड रिपन ने स्थानीय स्तर पर शासन व्यवस्था की परिकल्पना की | इसलिए रिपन को स्थानीय शासन के जनक की संज्ञा दी गई |
    स्वतंत्रता के पश्चात Act-40 में नीति निदेशक तत्व के रूप में ग्राम पंचायत के गठन का प्रावधान किया गया|
  • 2 अक्टूबर 1952 में, अमेरिका मॉडल पर आधारित सामुदायिक विकास को लागू किया गया | तथा 1953 में राष्ट्रीय विस्तार कार्यक्रम लागू किया गया जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास करना था |

जनवरी 1957 में C.D.P और N.E.P राष्ट्रीय विस्तार कार्यक्रम के मूल्यांकन के लिए- बलवंत राय मेहता कमेटी का गठन किया गया | जिसने नवंबर 1957 में अपना रिपोर्ट सौंपा तथा जिसमें-” लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का सुझाव दिया, बलवंत राय समिति की प्रमुख अनुशंसा थी की- “त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था लागू की जाए”-

  • निचले स्तर पर – ग्राम पंचायत
  • मध्यवर्ती स्तर पर- ब्लॉक पंचायत
  • शीर्ष स्तर पर- जिला पंचायत
  • ब्लॉक पंचायत को नियोजन एवं विकास की इकाई माना |

बलवंत राय मेहता की अनुशंसा पर Panchayati Raj का शुभारंभ स्वतंत्र भारत में 2 अक्टूबर 1959 ईस्वी को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के द्वारा राजस्थान के नागौर जिला में हुआ|
11 अक्टूबर 1959 ईस्वी को पंडित जवाहरलाल नेहरु ने आंध्र प्रदेश राज्य में Panchayati Raj का प्रारंभ किया|

Panchayati raj व्यवस्था से संबंधित समितियां

1. बलवंत राय मेहता समिति-
बलवंत राय मेहता समिति का गठन जनवरी 1957 में किया गया | बलवंत राय मेहता के अनुशंसा पर ही राजस्थान के नागौर जिले में सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 1959 को त्रिस्तरीय Panchayati Raj व्यवस्था लागू की गई |

2. अशोक मेहता समिति-
दिसंबर 1977 में अशोक मेहता समिति का गठन किया गया| जिसने द्विस्तरीय पंचायत व्यवस्था का सुझाव दिया-
15-20 हजार आबादी पर मंडल पंचायत और शीर्ष स्तर पर- जिला पंचायत का सुझाव दिया| अशोक मेहता समिति ने जिला पंचायत को नियोजन एवं विकास की गाई माना|
अशोक मेहता समिति ने सर्वप्रथम सुझाव दिया था कि पंचायती system व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया जाए|

3. पी. वी. के. राय समिति-
पी वी के राय समिति का गठन 1985 में किया गया| राव कमेटी का महत्वपूर्ण अनुशंसा था की जिसका उद्देश्य पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण विकास एवं गरीबी निवारण कार्यक्रम को संपादन किया जाना|राव कमेटी का महत्वपूर्ण अनुशंसा था की- ” D.M को विकासात्मक कार्य से अलग किया जाए तथा पंचायतों को विकास कार्यक्रमों से संलग्न किया जाए|”

4. एल. एम. सिंघवी(sindhwi) समिति-
इस समिति की स्थापना 1986 में किया गया जिन्होंने पंचायती राज्य को संवैधानिक दर्जा देने का सुझाव दिया| इस समिति के संवैधानिक दर्जा देने के सुझाव पर- 64वा संविधान संशोधन हुआ, यह बिल लोकसभा से पारित हुआ, परंतु राज्यसभा से पारित नहीं हो पाया|

पंचायती राजव्यवस्था से संबंधित संशोधन

73वा संविधान संशोधन :-

पी वी नरसिम्हा राव के समय, सितंबर 1991 में 73वां संविधान संशोधन लोकसभा में प्रस्तुत किया गया| जो 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ| 73वें संविधान संशोधन के कारण भारतीय संविधान में भाग-9 जोड़ा गया जो संविधान के अनुच्छेद 243 तथा संविधान में अनुसूची-11 जोड़ी गयी तथा पंचायतो को 29 विषयो पर कार्य करने के लिए शक्ति प्रदान किया गया |

73वा संविधान संशोधन की मुख्य बाते:

  • इसके द्वारा पंचायती system  की त्रिस्तरीय ढांचे का प्रावधान किया गया है|
    ग्राम स्तर पर- ग्राम पंचायत
    प्रखंड स्तर पर- पंचायत समिति
    जिला स्तर पर- जिला परिषद
  • पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक स्तर में एक-तिहाई स्थानों पर महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है|
  • इसका कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है| पंचायत भंग होने पर 6 माह के अंदर निर्वाचन होंगे|
  • राज्य की संचित निधि से इन संस्थाओं को अनुदान देने की व्यवस्था की गई है|

74वां संविधान संशोधन :-

74वां संविधान संशोधन नगरपालिकाओं से संबंधित है|1991 में 74वां संविधान संशोधन प्रस्तुत किया गया जो 1 जून 1993 को कानून के रूप में लागू हुआ| इसके द्वारा भारतीय संविधान में भाग-9(क), अनुच्छेद-243(Q से Z) एवं 12वीं अनुसूची जोड़ी गई और नगरपालिकाओं को 18 विषयों पर शक्ति प्रदान की गई|

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